सडकों पे बिकता इंसान
खोलोगे कब लब
अरे अब नहीं तो कब हो बहना...अब नहीं तो कब?
अब नहीं तो कब हो भैया...अब नहीं तो कब?
शिक्षा की है सजी दुकान
सपनों के महके पकवान
खाली अपनी जेब, ऊँचे उनके दाम
खोलोगे कब लब?
अरे अब नहीं तो कब हो बहना...अब नहीं तो कब?
अब नहीं तो कब हो भैया...अब नहीं तो कब?
अमरीका से आए डॉलर
सूद-नफे की खाए डॉलर
कंगला हमे बनाए डॉलर
खोलोगे कब लब?
अरे अब नहीं तो कब हो बहना...अब नहीं तो कब?
अब नहीं तो कब हो भैया...अब नहीं तो कब?
पैसा नहीं तो कर्जा लो
घर बेंचो, खेतों को गिरवी रख दो
पूंजीपतियों की जेबें भर दो
खोलोगे कब लब?
अरे अब नहीं तो कब हो बहना...अब नहीं तो कब?
अब नहीं तो कब हो भैया...अब नहीं तो कब?
लोकेश lokeshmaltiprakash@gmail.com
नमस्कार !
जवाब देंहटाएंकोई सुनने वाला भी चाहिए.